लाॅकडाऊन- सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव

प्रस्तावना- लाॅकडाउन एक ऐसी आपातकाल स्थिति है जिसके अंतर्गत कोई भी घर से बाहर नहीं जा सकता है। इसमें यह जरूरी नहीं है कि आप घर पर हैं अर्थात आप जहां पर भी हैं इसके लागू होने से आप कहीं भी नहीं जा सकते है। यह एक आपातकालीन स्थिति का ही रूप है। इसे वर्तमान में एक वैश्विक महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लगाया गया है। यह लाॅकडाउन एक वृहद स्तर पर है। इसके साथ शहरों में कर्फ्यू भी हैं। भारत समेत कई देशों में यह लाॅगडाउन चीन के एक वुहान शहर से शुरू हुई कोरोना(COVID-19) वैश्विक महामारी के चलते लगाया गया है।

लाॅकडाऊन के सकारात्मक प्रभाव-
1. एक तरफ कोरोना पर काबू पाने में मददगार साबित हुआ क्योंकि जब लोग किसी के सम्पर्क में नहीं आयेंगे तो ये फैलेगा कैसे।
2. पर्यावरण को भी खुद को साफ़ करने का थोड़ा समय मिल गया। हमारी प्रकृति को जैसे नया जीवन मिल गया हो और प्रदूषण का स्तर भी बहुत कम हुआ है। क्यों की सारे यातायात के साधन बंद हैं, फैक्ट्रियां सब बंद हैं।
3. कई परिवारों में समय के कमी के कारण आई दूरियां लाॅकडाऊन की वजह से ख़तम हो गई।
4. लाॅकडाऊन से जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण आदि मामलों में कमी आई है।
5. भारत में लॉकडाउन कोरोना वायरस से निपटने के लिये किया गया और माना जाता है की यही इसका सर्वोत्तम उपाय है। कोरोना एक दूसरे में बड़े तेजी से फैलता है और इससे बचाव ही इसकी दवा है। हमारे प्रधानमंत्री जी ने देश की जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, लॉकडाउन का ऐलान किया।

लाॅकडाऊन के नकारात्मक प्रभाव-
1. अर्थव्यवस्था- लॉकडाउन के प्रभाव बहुत गहरे होते हैं, क्यों की यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को डगमगा देता है। जब हम काम पर जाते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है। जब देश के सभी कल कारखाने बंद होने की वजह से सभी को घर पर बैठना पङ रहा है जिसकी वजह से देश का विकास भी रुक गया है और इससे अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुँची है।
2. लॉकडाउन से देश के जी.डी.पी., विकास दर, सब में कमी आ गई है और यह किसी देश के लिये ठीक नहीं। हम दूसरे देशों की अपेक्षा कई वर्ष पीछे जा चुके है। परंतु जीवन से बढ़ कर शायद कुछ भी नहीं और ये हमारे नेता भी समझते हैं और हमारे हित में ही इस कदम को उठाया।
3.छोटे मजदूर, महिलाएं, दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग, इस लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। उनकी स्थिति कुछ ऐसी है की वे घर में रहे तो बिना खाए मर जाते और बाहर रहें तो इस महामारी से मर जाएं। 
4. लाॅकडाऊन की वजह से सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रभाव पङा है जिसके कारण सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आई है। 
5. लाॅकडाऊन की वजह से वैश्मयता भी बढीं है। 

निष्कर्ष:- लॉकडाउन के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव हैं, परंतु उद्देशय कोरोना से लड़ना और उसे हराना ही है। जब सरकार अपने अर्थव्यवस्था की चिंता न करते हुए हमारे हित के बारे में सोचते हुए इतना बड़ा कदम उठाया है तो, यह हमारा भी कर्तव्य है की हम इसका पालन करें। घर पर रहें, लोगों से दूरी बनायें रखें, खुद भी स्वास्थ रहें और दूसरों को प्रेरित करें। ऐसे संकट की घड़ी में सबको डट कर इसका सामना करना है।

राणा राम भाटिया की कलम से
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